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बाबा भदेश्वरनाथ कांवड़ महोत्सव में उमड़ी आस्था, शिवभक्तों की सेवा में जुटा मां शान्ति सेवा संस्थान

बाबा भदेश्वरनाथ कांवड़ महोत्सव में उमड़ी आस्था, शिवभक्तों की सेवा में जुटा मां शान्ति सेवा संस्थान


अयोध्या से सरयू जल लेकर पहुंचे कांवड़ यात्रियों का हुआ भव्य स्वागत, तेज प्रताप सिंह ‘सुड्डू’ ने जताया आभार


बस्ती। श्रावण मास के पावन त्रयोदशी पर्व पर निकट फुटहिया चौराहा स्थित क्षेत्र में मां शान्ति सेवा संस्थान के तत्वावधान में ‘श्री बाबा भदेश्वरनाथ कांवड़ महोत्सव-2026’ का आयोजन श्रद्धा, सेवा और भक्ति के वातावरण में हुआ। अयोध्या धाम से पवित्र सरयू जल लेकर बाबा भदेश्वरनाथ के जलाभिषेक के लिए जा रहे कांवड़ यात्रियों के स्वागत और सेवा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं।


महोत्सव के दौरान बड़ी संख्या में कांवड़ भक्त आयोजन स्थल पर पहुंचे। शिवभक्तों के लिए जलपान, सेवा और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई। ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा भदेश्वरनाथ’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय नजर आया। इसके बाद कांवड़ यात्री बाबा भदेश्वरनाथ मंदिर की ओर रवाना हुए।


2009 से जारी है सेवा की परंपरा


मां शान्ति सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि कांवड़ यात्रियों की सेवा का यह पुनीत कार्य वर्ष 2009 से निरंतर किया जा रहा है। संस्थान का उद्देश्य कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना और उनकी यात्रा को सुगम बनाना है।


आयोजन की सफलता पर संस्थान के अध्यक्ष तेज प्रताप सिंह ‘सुड्डू’ एवं उपाध्यक्ष सिम्पी सिंह को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में सहयोग करने वाले जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों के योगदान की सराहना की गई।

कांवड़ियों की सेवा भगवान शिव की सेवा के समान’

मां शान्ति सेवा संस्थान के अध्यक्ष तेज प्रताप सिंह ‘सुड्डू’ ने महोत्सव में सहयोग और सहभागिता करने वाले सभी जनपदवासियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रियों की सेवा करना भगवान शिव की सेवा के समान है। सभी के सहयोग, समर्थन और आशीर्वाद से महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।

उन्होंने बाबा भदेश्वरनाथ से सभी श्रद्धालुओं और जनपदवासियों के सुख, समृद्धि एवं मंगल की कामना की। साथ ही कहा कि श्रावण मास में कांवड़ यात्रियों के स्वागत और सेवा की यह परंपरा भविष्य में भी पूरी श्रद्धा एवं समर्पण के साथ जारी रहेगी।

महोत्सव ने सेवा, आस्था, सामाजिक सहभागिता और आपसी सद्भाव का संदेश दिया।

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