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संगीत की राह पर संघर्ष और समर्पण की मिसाल बने विकास जैन 'द वीजे'

संगीत की राह पर संघर्ष और समर्पण की मिसाल बने विकास जैन 'द वीजे'



विकास जैन 'द वीजे' की संगीत यात्रा संघर्ष, भक्ति गीतों और रोमांटिक ट्रैक्स की अनूठी कहानी है। पहलाज़ निहालनी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्होंने अपनी मौलिक रचनाओं और उपलब्धियों के बारे में बात की। जानिए उनकी पूरी कहानी।

संगीत जगत केवल सफलता की चमकदार कहानियां नहीं सुनाता, बल्कि इसमें संघर्ष, समर्पण और अटूट विश्वास की मिसालें भी छुपी रहती हैं। ऐसा ही एक कलाकार हैं विकास जैन, जिन्हें 'द वीजे' नाम से भी जाना जाता है। हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ निर्माता-निर्देशक पहलाज़ निहालनी के निधन की खबर ने पूरे मनोरंजन जगत को शोक में डुबो दिया। इस दुख की घड़ी में विकास जैन भी भावुक हो उठे।


पहलाज़ निहालनी के निधन पर विकास का शोक

पहलाज़ निहालनी के जाने से विकास जैन ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह एक भावनात्मक क्षण है। अनुभवी व्यक्तियों से मिली प्रेरणा और आशीर्वाद उनके आगे बढ़ने का आधार रहे हैं। उनके जाने के बाद एक खालीपन महसूस हो रहा है, लेकिन यही लोग आगे की राह दिखाते रहे हैं। विकास का मानना है कि ऐसे महानुभावों की याद उन्हें नई ऊर्जा प्रदान करती रहेगी।


मौलिक भक्ति गीतों की अनोखी रचना

भक्ति गीत लिखने, बनाने और गाने की महत्त्वाकांक्षा विकास जैन के मन में सदैव रही है। इसी क्रम में उन्होंने एक जैन भजन तैयार किया, जो पूरी तरह मौलिक है। इसके शब्द, धुन और भाव नए हैं। आज के युग में जहां पुराने गीतों को नया रूप दिया जाता है, वहां पूर्णतः मौलिक रचना तैयार करना बड़ी उपलब्धि है।

भजन के बोल इस प्रकार हैं- “जिन को मेरा शत शत प्रणाम, जिन दर्शन के शुभ परिणाम, वो है बीर, वो है बीर वो महावीर”। सीमित प्रचार के बावजूद यह रचना श्रोताओं के बीच काफी सराही गई। विकास की गायकी की खासियत यह है कि वे गीतों को केवल गाते नहीं, बल्कि उन्हें जीते भी हैं। भावों की सही अभिव्यक्ति और मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुति उनकी पहचान बन गई है।

हनुमान, माता रानी और शिव स्तोत्र की भक्ति धारा

विकास की भक्ति यात्रा यहीं नहीं रुकती। बालाजी महाराज पर आधारित भजन “हनुमान जी बहुत ही पवित्र दिन है मंगलवार, महावीर जी की ही सृष्टि मे सरकार” भी लोकप्रिय हुआ। माता रानी की एक भेंट में उन्होंने गाया- “माँ, द्वार तेरे तज संसार मैं आया, मेरे मन-मंदिर को मैया, तूने ही महकाया।” इन शब्दों में भक्ति, समर्पण और गहरी भावनाएं झलकती हैं।


आध्यात्मिक संगीत में उनकी अलग छाप “शिव रुद्राष्टकम् स्तोत्र” से भी दिखती है। भक्ति धारा चैनल पर पहाड़ी राग में प्रस्तुत यह स्तोत्र गौस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित है। श्रोताओं के मन में ऊर्जा और श्रद्धा का संचार करने वाली यह प्रस्तुति उनकी कला की गहराई दर्शाती है।


रोमांटिक गीतों से पार्टी ट्रैक्स तक की यात्रा

विकास जैन रोमांटिक गीतों के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपने गीतों में स्वयं अभिनय किया, जिससे प्रस्तुतियां और प्रभावशाली बनीं। हाल के वर्षों में कई रोमांटिक गीत रिलीज हुए, जिन्हें प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और लाखों सब्सक्राइबर्स वाले यूट्यूब चैनलों पर जगह मिली।


पार्टी सॉन्ग्स में भी उनकी ऊर्जावान आवाज और आधुनिक प्रस्तुति युवा श्रोताओं को आकर्षित करती है। जगजीत सिंह साहब की फिल्म ‘तुम बिन’ के मूल ट्रैक पर टी-सीरीज स्टेजवर्क्स के माध्यम से गाने का अवसर मिलना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही। सुर, ताल और भाव का सुंदर संतुलन उनकी संवेदनशील कलाकार छवि को उजागर करता है।


मुंबई की यात्रा और नई संभावनाएं

आज विकास का मुंबई आना-जाना लगातार जारी है। फिल्म, संगीत और मनोरंजन उद्योग से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उनके गीत की स्क्रीनिंग हुई, जो उनके लिए गर्व का विषय रहा। यूट्यूब पर उनके नाम से भजन, रोमांटिक ट्रैक्स और विभिन्न प्रस्तुतियां आसानी से उपलब्ध हैं। यह स्वतंत्र कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि है।


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