रिपोर्ट- प्रियंका तिवारी
मालवीय गंगा शोध केंद्र बंद होने की बड़ी वज़ह आई सामने
महिला प्रोफेसर के नो-ड्यूज के चक्कर में बंद हुआ बीएचयू में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मालवीय गंगा शोध केंद्र
-बीएचयू केन्द्रीय कार्यालय पर गंगा मित्रों का जोरदार धरना -प्रदर्शन
-कुलसचिव ने स्वीकारा महिला प्रोफेसर के पत्र से बंद हुआ बीएचयू का मालवीय गंगा शोध केंद्र
वाराणसी:- गंगामित्र कोआर्डिनेटर धर्मेन्द्र पटेल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में गंगामित्रों की टीम ने बीएचयू केंद्रीय कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी गंगा मित्र गत दिनों अचानक बंद किए गये पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी योजना गंगा निर्मलीकरण के लिए मालवीय गंगा शोध केंद्र को पुनः चालू करने की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शनकारी गंगा मित्रों को बीएचयू प्राक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया। लेकिन धक्का मुक्की के बीच गंगा मित्र केन्द्रीय कार्यालय के गेट पर ही धरने पर बैठ गये और नारेबाजी करने लगे।
कड़ी मशक्कत के बाद बीएचयू प्रशासन द्वारा मात्र 5 गंगामित्रों को बीएचयू कुलसचिव से मिलने की अनुमति मिली। इस बाबत गंगा मित्र कोआर्डिनेपर धर्मेन्द्र पटेल ने कहा कि वार्ता के दौरान रजिस्ट्रार प्रोफेसर अरूण कुमार सिंह ने मालवीय गंगा शोध केन्द्र की पूर्व कोआर्डिनेटर एवं आई.इ.एस.डी. की प्रोफेसर कविता शाह के पत्र का जिक्र करते हुये कहा कि पिछले 6 वर्षाे से गंगा सेंटर पर न तो कोई फण्डिंग हुआ और न ही कोई कार्य हुआ। वार्ता में उन्होंने यह भी बताया कि कविता शाह द्वारा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु की वाइसचांसलर का पद ग्रहण करने से पूर्व नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया में यह पत्र लिखा गया। जिसमें गंगा शोध केन्द्र को फंिण्डंग और कार्य न होने की बात कही गई है। गंगामित्रों ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त करते हुये कुलसचिव से जबाव मांगा कि क्या केवल एक महिला के कहने पर केन्द्र को बंद कर देना न्यायोचित है? बीएचयू प्रशासन द्वारा केन्द्र से ग्राउण्ड रिपोर्ट क्यों नहीं मांगी गई?
कुलसचिव से वार्ता के दौरान गंगामित्रों की टीम ने गंगा शोध केंद्र द्वारा विगत 6 वर्षों मे निरन्तर किये गए कार्यों की रिर्पोट दिखाई गई। जिसमें नमामि गंगे परियोजना के अन्तर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगामिशन भारत सरकार द्वारा लगातार वर्ष 2017 से 2023 तक मिल रहे वित्तीय सहायता का भी जिक्र किया गया। यह रिकार्ड बीएचयू के सिरीक विभाग में उपलब्ध है।
महिला प्रोफेसर की बातों को गलत बताते हुये गंगामित्रों ने कुलसचिव को यह भी बताया कि पिछले 6 वर्षों से प्रोफेसर कविता शाह कभी भी केन्द्र पर नहीं आती थी और उनको केन्द्र के प्रोग्रेस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बिना तथ्य को जाने बिना 6 वर्षों वाला उनका लिखित पत्र एकदम गलत है। केवल उनके पत्र का संज्ञान लेकर लगातार कार्यरत महामना मालवीय गंगा शोध केन्द्र को बीएचयू प्रशासन द्वारा बंद करना सरासर गलत है। इसको पुनः संचालित करने हेतु जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जाये नहीं तो गंगामित्र अपनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जायेगें।


