धर्मेंद्र कुमार पाण्डेय
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में वर्ष 2021 के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए. इस अवसर पर प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार वहीदा रहमान को प्रदान किया गया. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर, केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव अपूर्व चन्द्र, जूरी के अध्यक्ष और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वहीदा रहमान को बधाई दी और कहा कि उन्होंने अपनी कला और व्यक्तित्व से फिल्म उद्योग के शिखर पर खुद को स्थापित किया है. अपने निजी जीवन में भी उन्होंने एक गरिमा, आत्मविश्वास और मौलिकता से ओत-प्रोत महिला की पहचान बनाई. उन्होंने कई फिल्में ऐसी चुनीं जिनमें उनकी भूमिकाओं ने आमतौर पर महिलाओं से जोड़ी जाने वाली कई सीमाओं को तोड़ा. वहीदा जी ने एक मिसाल कायम की है कि महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं को खुद भी पहल करनी चाहिए.
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के बारे में बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह पुरस्कार समारोह भारत की विविधता और उसमें निहित एकता की तस्वीर पेश करता है. उन्होंने कहा कि समारोह में उपस्थित प्रतिभाशाली लोगों ने कई भाषाओं, क्षेत्रीय विशेषताओं, सामाजिक मान्यताओं, उपलब्धियों और समस्याओं को सार्थक अभिव्यक्ति दी है और यह कि इन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में कई पीढ़ियों और वर्गों के लोग एक साथ आए हैं.
फिल्म जगत और कलाकारों को परिवर्तन का वाहक बताते हुए, उन्होंने कहा कि वे अपनी फिल्मों के माध्यम से भारतीय समाज की विविध वास्तविकता का जीवंत परिचय देते हैं. उन्होंने कहा कि सिनेमा हमारे समाज का एक दस्तावेज भी है और उसे बेहतर बनाने का एक माध्यम भी और उनका काम लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है.
राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रतिभा से समृद्ध इस देश में सिनेमा से जुड़े लोग विश्वस्तरीय उत्कृष्टता के नए मानक स्थापित करते रहेंगे और फिल्में विकसित भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी.
केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भारतीय फिल्म उद्योग पर गर्व व्यक्त किया और कहा कि आज कुछ भी क्षेत्रीय नहीं है, यदि सामग्री अच्छी हो तो क्षेत्रीय सामग्री को भी वैश्विक स्तर पर दर्शक मिलेंगे. दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान के बारे में बोलते हुए, ठाकुर ने कहा कि चूंकि भारतीय फिल्में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से परे जाती हैं, इसलिए इसी प्रकार की प्रसिद्धि का दावा उनके संदर्भ में भी है. उन्होंने उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर हार्दिक बधाई दी.
अनुराग ठाकुर ने श्रोताओं को सूचित किया कि सरकार फिल्म पाइरेसी से निपटने के अपने प्रयासों में फिल्म उद्योग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है. सरकार ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम पेश किया है, जो इस खतरे को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है. अनुराग ठाकुर ने भारत में एवीजीसी क्षेत्र की क्षमता के बारे में बात की और कहा कि सरकार इस क्षेत्र के लिए एक नीति लाने जा रही है और इससे भारत को 'दुनिया का कंटेंट केंद्र' के रूप में अपनी क्षमता का उपयोग करने में मदद मिलेगी.
सचिव, अपूर्व चन्द्र ने बताया कि पुरस्कार वर्ष 2021 के लिए प्रदान किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 का वर्ष के दौरान सिनेमा हॉल बंद रहे थे और फिल्म उद्योग संघर्ष कर रहा था. हालाँकि, हमने जल्द ही वापसी की. अब देश और फिल्म उद्योग दोनों ही विकास की राह पर वापस आ गए हैं और पिछली तिमाही भारत के फिल्म उद्योग के लिए सबसे अच्छी रही है. उन्होंने कहा कि जहां बॉक्स ऑफिस पर सफलता महत्वपूर्ण है, वहीं फिल्म पुरस्कार गुणवत्ता का उत्सव मनाते हैं. श्री अपूर्व चन्द्र ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार स्वीकार करने के लिए सुश्री वहीदा रहमान का आभार व्यक्त किया.
*इन फिल्मों को मिला सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार*
सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार ‘रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट’ को दिया गया है और सृष्टि लखेरा द्वारा निर्देशित ‘एक था गांव’ ने सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार हासिल किया.
‘द कश्मीर फाइल्स’ को राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि ‘आरआरआर’ को संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का पुरस्कार मिला.
*एक्टिंग का सर्वश्रेठ पुरस्कार*
अल्लू अर्जुन ने फिल्म पुष्पा (द राइज पार्ट I) में अपने शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि आलिया भट्ट और कृति सैनन क्रमशः ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ‘मिमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार की संयुक्त विजेता बनीं.
*सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार निखिल महाजन को*
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मराठी फिल्म ‘गोदावरी’ के लिए निखिल महाजन को दिया गया. पंकज त्रिपाठी को ‘मिमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार और पल्लवी जोशी को ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार दिया गया
विवेक रंजन अग्निहोत्री के निर्देशन वाली ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने राष्ट्रीय एकीकरण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए नरगिस दत्त पुरस्कार भी जीता.
आरआरआर को मिले छह पुरस्कार
आरआरआर फिल्म के संगीत निर्देशक एम एम कीरावनी ने ‘पुष्पा…’ के संगीत निर्देशक देवी प्रसाद के साथ सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन का पुरस्कार साझा किया. एसएस राजमौली द्वारा निर्देशित फिल्म ने दर्शकों को भरपूर मनोरंजन प्रदान करने के लिए सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म, काला भैरव को सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक, सर्वश्रेष्ठ स्पेशल इफेक्ट्स, सर्वश्रेष्ठ एक्शन निर्देशन और सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का पुरस्कार मिला.
*संजय लीला भंसाली को सातवीं बार राष्ट्रीय पुरस्कार*
कमाठीपुरा की ताकतवर और प्रतिष्ठित वेश्या पर संजय लीला भंसाली की भव्य बायोपिक ‘‘गंगूबाई काठियावाड़ी’’ ने पांच पुरुस्कार जीते. आलिया भट्ट को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के अलावा भंसाली ने उत्कर्षिनी वशिष्ठ के साथ सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले लेखक और फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार भी जीता. वशिष्ठ तथा प्रकाश कपाड़िया ने इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखक और प्रीतिशील सिंह डिसूजा ने सर्वश्रेष्ठ मेकअप कलाकार का पुरस्कार भी जीता.
संजय लीला भंसाली को सातवीं बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. इसके पहले ‘पद्मावत’, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘मैरी कॉम’, ‘देवदास’ और ‘ब्लैक’ के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि वह खुश हैं कि आलिया भट्ट को उनके निर्देशन वाली फिल्म के लिए पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है.
सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार श्रेया घोषाल को
श्रेया घोषाल ने फिल्म ‘‘इराविन निझाल’’ के लिए अपने गीत ‘‘मायावा छायावा’’ के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार जीता. ‘ऑरिजिनल स्क्रीनप्ले’ का पुरस्कार मलयालम फिल्म ‘‘नायट्टू’’ और उसके लेखक शाही कबीर को दिया गया.
मलयालम फिल्म ‘‘मेप्पदियां’’ के निर्देशक को सर्वश्रेष्ठ डेब्यू (नवोदित) फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार मिला है. जबकि सामाजिक मुद्दों पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार असमी फिल्म ‘‘अनुनाद-द रेजोनेंस’’ को मिला.
शूजीत सरकार की बायोपिक ‘‘सरदार उधमसिंह’’ ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म के साथ ही सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी (री-रिकॉर्डिंग फाइनल मिक्सिंग), सर्वश्रेष्ठ प्रोडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम (वस्त्र) डिजाइन का पुरस्कार मिला. जूरी को फीचर, नॉन फीचर और बेस्ट राइटिंग ऑन सिनेमा के ऊपर लगभग 430 आवेदन हमें प्राप्त हुए थे.


