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आपकी शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा देगा 'भूनमनासन', आंतरिक अंगों को देगा बल :नियमित अभ्यास रखेगा निरोगी - योगाचार्या सन्नो दुबे

आपकी शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा देगा 'भूनमनासन', आंतरिक अंगों को देगा बल :नियमित अभ्यास रखेगा निरोगी - योगाचार्या सन्नो दुबे 

भूनमनासन को हठ योग का मध्यम कठिनाई वाला योगासन माना जाता है और यह तीन शब्दों (भू, नमन और आसान) के मेल से बना है। इसमें भू का अर्थ पृथ्वी, नमन का मतलब अभिवादन और आसन का अर्थ मुद्रा है।शाब्दिक अर्थ: भू अर्थात पृथ्वी या भूमि। नमन का अर्थ प्रणाम या झुकना भूनमन अर्थात् भूमि को आदर से नमन करना।इस आसन के बारे में योग विशेषज्ञों की राय है की  यह योगासन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक आसनों में से एक है।इसका नियमित अभ्यास हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।कुछ योग शिक्षक इस आसन को पक्षी आसन भी कहते हैं।


आइए आज हम आपको भूनमनासन के अभ्यास का तरीका, इसके फायदे और इससे जुड़ी अन्य कुछ महत्वपूर्ण बातें बताते हैं।

विधि :इस आसन को करने के लिए अपने आसन में सामने की तरफ़ पैर फैलाकर बैठ जाएँ। अब धीरे-धीरे पैरों को पक्षियों के पंखों की तरह फैला लें (चित्र देखें) एवं दाहिने हाथ से दाहिने पैर के अंगूठे को पकड़ें व बाएँ हाथ से बाएँ पैर के अंगूठे को पकड़ें। एड़ी से जाँघ तक का हिस्सा ज़मीन पर स्पर्श करता रहे। श्वास छोड़ते हुए वक्षःस्थल को सामने नीचे की तरफ़ झुका कर पेट, छाती एवं ठुड्डी को ज़मीन से स्पर्श कराएँ। 5 से 10 सेकंड रुकें एवं श्वास भरते हुए मूल अवस्था में आ जाएँ।

इसके अभ्यास से होने वाले लाभ - 

यह आसन पीठ, पैरों और हाथों की मांसपेशियों को मजबूती देता है।अगर आप इस आसन का अभ्यास नियमित रूप से करते हैं तो आपको ढेर सारे लाभ मिलते हैं आइये जानते हैं इस आसन के लाभ के बारे में।

यह आसन अगर आप नियमित रूप से करते हैं तो आपकी पीठ और हाथों को की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है इसके साथ साथ इस आसन का अभ्यास संतुलन शक्ति को बढ़ाता है।यदि आप थकान महसूस करते हैं तो इस आसन के अभ्यास से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ जाता है जिससे आप ऊर्जावान महसूस करते हैं।इस आसन से कूल्हे और घुटनों से संबंधित समस्याएं दूर हो जाती हैं।आंतरिक अंगों को भी बल मिलता है जिससे वे अंग अच्छे से कार्य कर पाते हैं। इस आसन का अभ्यास थायराइड रोगियों के लिए भी लाभदायक है।यह आसन लिवर के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।ध्यान अवस्था में मन लगता है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। अतः मांसपेशियाँ, सर्भ नस-नाड़ियाँ और हड्डियों को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है।मोटापे को कम करने में भी सहायता मिलती है। मूत्र-संस्थान केरोग या विकार ठीक होते हैं

यह है भूनमनासन करने का सही तरीका

सबसे पहले योगा मैट या किसी चटाई का उपयोग बैठने के लिए कर लें तत्पश्चात मैट पर दंडासन की मुद्रा में बैठ जाएं और अपनी क्षमतानुसार पैरों को फैलाएं, ध्यान रहे की शुरू में आपके पैर पूरे नहीं खुलेंगे अतः जितना खुल सके उतना ही खोलें । इस दौरान आपके पंजे बिल्कुल सीधे होने चाहिए।

अब अपने दोनों हाथों से पैरों के अंगूठों को पकड़ने की कोशिश करें, यदि आप अपने पैरों के अंगूठे को नहीं छू पा रहे तो आप नमस्कार की मुद्रा में अपने हाथ जोड़ कर आगे की तरफ भी कर सकते हैं । इसके बाद सामान्य रूप से सांस लेते हुए आगे की तरफ झुककर सिर को जमीन से लगाने का प्रयास करें।जब आपकी शरीर भूमि से बिलकुल सट जाये तो आप थोड़ी देर इसी अवस्था में स्वयं को रोके रखें। 5 से 10 सेकंड रुकें एवं श्वास भरते हुए मूल अवस्था में आ जाएँ।अपनी क्षमतानुसार इस मुद्रा में रहते हुए सामान्य गति से सांस लेते रहें, फिर गहरी सांस लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में आएं।इस क्रिया का दोहराव करें।

भूनमनासन के अभ्यास के दौरान बरतनी चाहिए ये सावधानियां

आप कोई भी आसन करें आपको कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए।अगर आपको रीढ़ की हड्डी, कंधों, हाथों, पैरों या घुटनों से जुड़ी कोई समस्या या दर्द है तो इस योगासन का अभ्यास करने से बचें।अगर आपको ब्‍लड प्रेशर, हर्निया, पेट के अल्‍सर, स्पोंडिलाइटिस और माइग्रेन जैसी बीमारियां हैं तो आपको भी इस योगासन का अभ्यास करने से बचना चाहिए।गर्भावस्था और मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को भी इस योगासन का अभ्यास बिलकुल नहीं करना चाहिए।खाना खाने के तुरंत बाद इस योगासन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।आसन व श्वास के प्रति सजग रहें। कठिन होने के कारणा जल्दबाज़ी न करें। क्रमशः आराम से करें।


योगासन के अभ्यास से जुड़े उपयोगी टिप्स 

इस योगासन का अभ्यास करने से पहले कुछ हल्की-फुल्की स्ट्रैचिंग एक्सरसाइज कर लें।अगर आप पहली बार इस योगासन का अभ्यास करने जा रहे हैं तो सबसे पहले इसकी प्रक्रिया को अच्छी तरह से समझ लें और फिर इसकी मुद्रा को बारीकी से समझने का प्रयास करें।आपको किसी योग शिक्षक की निगरानी में इसका अभ्यास करना चाहिए जिससे आप योग का गलत तरीका न करके बल्कि सही तरीका समझ सकें।इस योगासन को करते समय ज्यादा कसे हुए कपड़े न पहनें।

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