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कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) ए0 सी0 तिवारी ने किसानों को दिया सुझाव : ऐसे सुरक्षित रख सकते हैं अपनी फसल को

ए0 सी0 तिवारी कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) ने किसानों को दिया सुझाव 

बस्ती।प्रिय किसान भाईयों खरीफ की फसलों में मुख्यतः धान एवं मक्का के फसलो में विभिन्न प्रकार के सामयिक कीट/रोग एवं खरपतवार की समस्या होती है। उक्त जानकारी देते हुए उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) ए0 सी0 तिवारी ने बताया कि जिसका नियंत्रण/प्रबंन्धन कर फसलों को उनके द्वारा हानि पहुचाने से बचाया जा सकता है। उन्होने बताया कि धान में संकरी एवं चौडी पत्ती खरपतवार:-यदि रोपाई करते समय खरपतवारनाशी का प्रयोग न कर पाये हो, तो संकरी, चौडी पत्ती (3-5 पत्ती अवस्था) के लिए रोपाई से 25-26 दिन के अन्दर विसपायरीबैक सोडियम 10 प्रति0 एस0सी0 0.20 लीटर मात्रा का 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हक्टेयर की दर से छिडकाव कराना चाहिए। अथवा निराई-गुडाई/यांत्रिक विधि से नियंत्रण कर सकते हैं।

उन्होने बताया कि धान में पत्ती लपेटक कीट- इसके नियंत्रण हेतु खेत में 4 से 5 सेमी0 पानी भरकर नारियल की रस्सी को धान के ऊपर घुमा दें जिससे सूंडी पानी में गिरकर नष्ट हो जायेंगी। यह प्रक्रिया सप्ताह में दो बार दोहरायें प्रकोप की अधिकता की स्थिति में थियामेथोक्स 8.8 प्रतिशत क्लोरएंट्रानिलिप्रोएल 17.5 प्रतिशत एस0सी0 0.250 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 600-700 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। 

उन्होने बताया कि धान में तना बेधक कीट:-धान में तना बेधक कीट के नियंत्रण के लिए ट्राइकोकार्ड (एक कार्ड प्रति एकड) का प्रयोग करें। धान के तना छेदक कीट तने को अन्दर से खाता रहता है जिसके बाद तना सूखा हुआ दिखाई पडता है जिससे तना पहले पीला तथा बाद में लाल रंग का होकर सूख जाता है इसके नियंत्रण हेतु सर्वप्रथम खेत एवं आसपास के मेडों से घास एवं खरपतवार को निकाल कर नष्ट कर दें यदि कीट दिखाई देे तो डेल्टामैथ्रिन 11 प्रतिशत ई0सी0 250 मि0ली0 लीटर मात्रा एवं लेम्डासायहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत 500 मि0ली0 मात्रा प्रति हेक्टेयर को 700-800 लीटर पानी में या क्यूनालफॉस 25 प्रतिशत ई0सी0 1.5 लीटर मात्रा को 500-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव करना चाहिए।

उन्होने बताया कि धान में दीमक एवं जड की सूडी:-इसके नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस 20 प्रति0 ई0सी0 2.5 लीटर प्रति0 हेक्टेयर की दर से सिचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए। धान में खैरा रोगः-रोपाई के 1 माह के अन्दर धान की पत्तियॅा पीली पडने लगती हैं जिसके नियंत्रण हेतु 5 किग्रा0 जिंक सल्फेट को 20 किग्रा0 यूरिया अथवा 2.5 किग्रा0 बुझे हुए चुने को प्रति0 हेक्टेयर की दर से 1000 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।

 उन्होने बताया कि मक्का मे तना वेधक कीट:-मक्का के फसल में तना वेधक कीट का प्रकोप 10 प्रति0 मृतगोभ की आर्थिक क्षति स्तर पर डाईमेथोएट 30 प्रति0 ई0सी0 1 लीटर मात्रा अथवा क्यूनालफॅास 25 प्रति0 ई0सी0 1.5 ली0 मात्रा को प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए। मक्का मे फाल आर्मी वर्म कीट:- यह मक्का की फसल में लगने वाला हानिकारक कीट है इसकी संख्या 5 प्रतिशत पौध तथा 10 प्रतिशत गोभ क्षति की अवस्था में कीट नियंत्रण हेतु एन0पी0वी0 250 एल0ई0 अथवा मेटाराइजियम एनाईसोप्ली 5 ग्राम प्रति0 लीटर पानी अथवा बी0टी0 2 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा नीम आयल 5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से छिडकाव करना चाहिए। इसके रसायनिक नियंत्रण हेतु इन्डोक्साकार्ब 500 मिली प्रति0 हेक्टेयर अथवा क्लोरएंट्रानिलिप्रोएल 17.5 प्रतिशत एस0सी0 200 मिली प्रति0 हेक्टेयर की दर से 600-800 लीटर पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।

      

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